Tuesday, 26 November 2013

इंसान बानी




आँख बा पर आन्हर बानी 
कान बा पर बहिर  बानी 
बुझतो बानी 
पर मानत नइखीं । 
गलल जा तानी 
पर मद में बानी,
पिघल तानी 
पर दम्भ में बानी । 
बिसरा देहनी सब सहूर तबो 
जानल मानल इंसान बानी । 

स्वाति वल्लभा  राज 

3 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. bahut sundar rachna ba .....................

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  3. क्‍या बात है .... बेहतरीन

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